Astrology

मेरे गुरु देव(श्री चंदुलाल शकराभाई पटेल)

उपेन्द्रसिंह भदौरिया

रात्री के 1.45 बजे एक 92 वर्षिय वृद्ध अपनी बेटी की जन्म कुंडली देख रहा था जब मैने पुछा कि गुरुदेव क्या कर रहे हो तब वे बोले कि “मैं कैलाश की जन्म कुंडली देख रहा हूँ। आज सभी ग्रह कैलाश बहन की जन्म कुंडली 20 से कम बिन्दु वाली राशि मे से गोचर कर है शाम 4.00 बजे से केवल चंद्र 40 बिन्दु वाली राशि में से गुजर रहा है”। तब मैने कहा कि “गुरूदेव हमें भगवान ने दो दिन की मौहलत दी है सब अच्छा हो जायगा” । यह मेरी जिन्दगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन था जब मैं विश्व के कथित नही परंतु वास्तव में सर्वश्रेष्ठ ज्योतिष मनिषी के  साक्षात्  दर्शन कर था।कैलाश बहन गुरुदेव की जेष्ठ पुत्री जिनकी उम्र 67 वर्ष की थी । वे दोनो मुम्बई में अकेले रहते थे साथ ही मेरी जानकारी अनुसार उनका कोई निकट संबधी भी वहाँ नही रहता था । मै भी उसी दिन गुरुदेव के बुलावे पर उनके पुस्तकालय को देखने अहमदाबाद से वहाँ पहुँचा था और रात्री के 8.30 बजे बहनजी को दिल का दौरा पड़ा तथा मैं ही उन्हें अस्पताल में भर्ती करवा कर घर पर रात्री के 1:45 बजे जब लौटा तब मुझे गुरुदेव की चिंता सता रही थी कि कहीं गुरुदेव भी गंभीर हाल में न हो। कारण कि संकट समय में अच्छे- अच्छे विद्वान होंश  भूल जाते है पर गुरुदेव की ज्योतिषशास्त्र के प्रति अपार श्रद्धा और विश्वास ने मुझे नतमस्तक कर दिया।और मेरी इस शास्त्र के प्रति मजबुत प्रिती हो गई।फिर लगातार गुरुदेव के पास से ज्योतिष सिखता रहा मैं उन चँद भाग्यशाली लोगों में से एक हूँ जिन्हे श्री चंदुलाल शकराभाई पटेल का सानिध्य प्राप्त हुआ, प्यार मिला , ज्योतिष के गहनतम् रहस्यों का ज्ञान मिला और मुझे उनके द्वारा संचित सारी पुस्तके भी प्राप्त हुई। सबसे किंमती वस्तु मुझे ज्योतिष फल कथन करने का जबरजस्त आत्मविश्वास मिला। वे जिन टेक्निकों का उपयोग करते थे संभवत: वे सभी मुझे मिली ही नही उनका व्यवहारिक उपयोग भी उनसे जाना । मैं आज गुरुक़ृपा से अहमदाबाद में स्थित भारतीय ज्योतिष संस्थान में उनके द्वारा प्रदान किये गये ज्ञान को विद्यार्थियों में मुक्त रुप से बाँटता हूँ। यहाँ पर उनके द्वारा ही सिखाई गई ज्योतिष विद्या मेरे जीवन में कैसे सचोट सिद्ध हुई उसका एक उदाहरण गुरुदेव के चरणो में समर्पित करता हूँ।

जन्माष्टमी 4/8/2008 दिन मंगलवार समय दोपहर 2.30 बजे मुझे दिल का गंभीर दौरा पड़ा जो अपेक्षित था जिसका मुल्यांकन मेरी एवं मेरे भाँजे की कुंड़ली के आधार पर कर गुरुदेवश्री के चरणों में समर्पित करता हूँ।

दृष्टांत कुंडली-1

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तत्तद्भावाष्टमेशांशे त्रिकोणेवाथवा भवेत् ।

स्फुटयोगं गते मन्दे तत्तद्भावविनाशनम् ॥

किसी भी भाव के अष्टमेश की नवमांश राशि या नवमांश राशि की त्रिकोण राशि में से जब गोचर का शनि पसार होता है और जब शनि राशि के अधिपती के अंश का होता है तब भाव की शुभता नष्ट हो जाती है।

(इसके व्यवहारिक उपयोग लिए मैं पहले शनि की गोचर राशि एवं उसकी त्रिकोण राशिओं को ध्यान में लेता हूँ फिर नवाँश कुंडली  देखता हूँ कि नवाँश कुंडली इन राशियों में ग्रह है या नही   यह देखता हूँ। यदि ग्रह हैं तो वे ग्रह जन्म कुंडली में किस भाव के स्वामी है वह देखता हूँ और उस भाव से छठ्ठे भाव को गिन उनका अनिष्ठ कहता हूँ। यह अनिष्ट फल शनि की गोचर राशि का अधिपति जितने अंश का होता है उस अंश के नवमांश अंतर के दौरान शनि अशुभ फल देता है, इस प्रकार सरलता पूर्वक इसका उपयोग किया जा सकता है।)

अभी शनि सिंह राशि में गोचर कर रहा है एवं सिंह की त्रिकोण राशियाँ मेष राशि और धनु राशि हैं अत: इन तीन राशियों को नवाँश कुंडली में देखें कि इनमें कोई ग्रह है या नही? मेरी नवाँश कुंडली में  मेष राशि में गुरु एवं चंद्र तथा धनु राशि में सूर्य एवं केतु हैं।केतु को छोडकर अन्य तीन ग्रह क्रमश: जन्म कुंडली के आठ, ग्यारह, तीसरे, एवं चोथे भाव के स्वामी हैं। आठवें भाव से छठ्ठा भाव लग्न अर्थात मैं स्वयं, ग्यारह भाव से छठ्ठा भाव चौथा भाव , तीसरे भाव से छठ्ठा भाव आठवाँ भाव, एवं चोथे भाव से छठ्ठा भाव नवमाँ भाव ये सभी भाव किसी किसी रूप में प्रभावित हुए।

तारिख 4/9/2007 के दिन शनि सिंह राशि में 06 अंश 11 कला का था जो मेरी कुंडली में सिंह राश्याधिपति सूर्य के 05 अंश 15 कला के अर्थात् 03 अंश 20 कला से 06 अंश 40 कला  के नवमांश में स्थित हैे नवमांश में था शनि के इस नवमांश परिभ्रमण के 13.8.2007 सें 8.9.2007 के बीच मुझे निम्न घटनाओं का सामना करना पड़ा।

1- जन्माष्टमी 4/9/2008 दिन मंगलवार समय दोपहर 2.30 बजे मुझे दिल का गंभीर दौरा पड़ा। जो प्रथम भाव (लग्न) से संबंधित है।( लग्न से आठवें भाव का अधिपति गुरु की नवमांश राशि मेष की त्रिकोण राशि सिंह के अधिपति सूर्य के नवमांश अंशान्तर पर से शनि का भ्रमण जातक को पीड़ा दे गया )

2- 20.08.2007 के रोज मेरी पैतृक संपति का हिस्सा जो लगभग एक करोड़ से अधिक कींमत में बिकना निर्धारित था हमारे पड़ोशी की दखल से नही बिका और आज रियल एस्टेट के भाव टूट्ने के कारण बिलंब में पडा है। जो आठवें भाव एवं चोथे भाव एवं नवमें से संबंधित है।

अब मेरे दिल के दौरे को मेरे भाँजे की कुडंली के द्वारा गुरूदेव के सिखाए गये उपरोक्त नियम के अनुसार ही बतलाता हूँ।

दृष्टांत कुंडली

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मेरे भांजे की कुंडली में लग्नेश शनि की नवाँश राशि मेष है।ता. 4/9/2008 के रोज शनि सिंह राशि में गोचर कर रहा था एवं सिंह की त्रिकोण राशियाँ मेष राशि और धनु राशि हैं अत: इन तीन राशियों को नवाँश कुंडली में देखें कि इनमें कोई ग्रह है या नही इस नवाँश कुंडली में मेष राशि में कोई ग्रह नहीं है,  तथा सिंह राशि में शनि एवं मंगल ग्रह हैं तथा धनु राशि में राहु हैं। सूर्य के 06 अंश 37 कला के अर्थात् 03 अंश 20 कला से 06 अंश 40 कला  के नवमांश में स्थित हैे नवमांश में था शनि के इस नवमांश परिभ्रमण के 13.8.2007 सें 8.9.2007 के बीच मुझे ता. 4/9/2008 के रोज मुझे मृत्यु तुल्य कष्ट का सामना करना पडा । शनि लग्न भाव का स्वामी हैं और लग्न भाव से छठ्ठा भाव छोटे मामा एवं मौसी को ईंगीत करता है।

दृष्टांत कुंडली-3

यह कुंडली श्री सी.एस. पटेल साहब के एक के प्रिय शिष्य की है। इस समय शनि सिंह राशि में गोचर कर रहा है एवं सिंह की त्रिकोण राशियाँ मेष राशि और धनु राशि हैं अत: इन तीन राशियों को नवाँश कुंडली में देखें कि इनमें कोई ग्रह है या नही इस  नवाँश कुंडली में  मेष राशि में कोई ग्रह नहीं है,  तथा सिंह राशि में शनि, बुध एवं राहु ग्रह हैं तथा धनु राशि में सूर्य एवं मंगल ग्रह हैं। ता. 27/11/2008 से 5.2.2009 एवं 13-8-2009 से 10-9-2009 के समयान्तर में शनि सिंह राशि के अधिपति सूर्य जो 26 अंश 51 कला के अर्थात् 26 अंश 40 कला से 30 अंश 00 कला  के नवमांश में भ्रमण करेगा। शनि अष्टम भाव का स्वामी हैं और अष्टम भाव से छठ्ठा भाव लग्न जो जातक का निर्देश करता है एवं शनि नवम भाव का स्वामी हैं और नवमें भाव से छठ्ठा भाव द्वितिय भाव हैं जो परिवार एवं धन का निर्देश करता है। बुध लग्न भाव का स्वामी हैं और लग्न भाव से छठ्ठा भाव जातक के मामा एवं मातुल पक्षका निर्देश करता है एवं बुध चौथे भाव का स्वामी हैं और चौथे भाव से छठ्ठा भाव नवमाँ भाव हैं जो पिता एवं भाग्य का निर्देश करता है।इन सभी संलग्न बातों के बारें में इन्हे ध्यान रखना होगा।

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गुरु देव के द्वारा बताए गये अन्य सिद्धांत में राहु की महादशा एवं शनि के गोचर वाला सिद्धांत भी अकाट्य हैं जिसे मैंने कई कुंड्ली मे जाँचा-परखा है और सटिक पाया है गुरुवंदना कर प्रस्तुत कर रहा हूँ।

चन्द्रांशराशिमारभ्य गोचरेव्वष्टमे शनौ ।

राहुदाये महत्कष्टं योगभंगं विनिर्निशेत् ॥

चन्द्र नवमाँश राशि से अष्टम राशि पर से शनि का गोचर राहु की महादशा में , जातक के लिए अत्यधिक मुसीबतो तथा समृद्धि में अवरोधों का निर्देश करता और इस समय अनुकुल योग भी कार्य नही करतें है।

(इसके व्यवहारिक उपयोग लिए मैं पहले राहु की महादशा को ध्यान में लेता हूँ यदि जातक की राहु की महादशा चल रही हो तब नवाँश कुंडली में चन्द्र किस राशि में यह देखता हूँ और उस राशि से अष्टम राशि में से यदि शनि गुजर रहा हो या गुजरने वाला हो तो वह समय जातक के लिए सही समय नही है यह जान उस जातक को यथायोग्य संभलकर कार्यकरने के लिए सलाह देता हूँ। इस प्रकार सरलता पूर्वक इसका भी उपयोग किया जा सकता है।)

 

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दृष्टांत कुंडली-4 श्री सी.एस. पटेल साहब की एक शिष्या की है जो अहमदाबाद में रहती हैं।इनकी कुंडली के अनुसार राहु की महादशा 3/2/1996 से शुरु हुई जो 3/2/2014 तक चलेगी। इनकी कुंडली में चंद्र तुला नवमांश में है अत: चंद्र नवमांश राशि की अष्टम राशि वृषभ हुई । तारिख 7/6/2000 से तारिख 24/7/2002 तक एवं तारिख 9/1/2003  से तारिख 08/04/2003 तक शनि का भ्रमण वृषभ राशि में था इस दौरान इस जातिका के पति के साथ व्यापार में 10 लाख रुपये का धोखा हुआ और वे बेकार हो गये, इनका घर बैंक जप्त कर लिया जिसे बडी मुशकिलों को झेलकर इस जातिका ने अपनी नौकरी में से प्रोविडन्ड फंड उठाकर, एल.आई.सी. सरेन्डर कर, गहने बेचकर एवं शेष रकम उधार ले कर बैंक से छुडवाया गया। जिस उधार भुगतान 2007 के अंत तक किया।

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दृष्टांत कुंडली-5  यह कुंडली हमारे व्यापार से संलग्न एक व्यापारी की है। जिन्होने अपने बलबुते पर व्यापार जमाया था जो भलिभाँति चल रहा था अचानक व्यापार में गिरावट आ गई जैसे पत्ते का महल ढह गया हो बहुत से ज्योतिषी – ओझाओं की मुलाकात ली परंतु डेढ साल तक कोई फरक नहीं पडा। तब वे किसी की सलाह पर मेरे पास ज्योतिष मशवरे के लिए आए। मैने पाया कि इनकी कुंडली के अनुसार इनकी राहु की महादशा 13/1/1988  से शुरु हुई जो 13/1/2006 तक चली। इनकी कुंडली में चंद्र वृश्चिक नवमांश में है अत: चंद्र नवमांश राशि की अष्टम राशि मिथुन हुई । तारिख 23/11/2002 से तारिख 09/1/2003 तक, तारिख 8/4/2003  से तारिख 06/09/2004 तक एवं तारिख 14/1/2005 से तारिख 26/5/2005 तक शनि का भ्रमण मिथुन राशि में था इस दौरान इस जातक के साथ व्यापार में कई मुसीबतें आई। लगभग 35 लाख रुपये का आर्थिक नुकशान हुआ और व्यापार में पैसा फँस गया। जिससे वह अब धीरे धीरे उभर रहा है।

शनि की ढैया या साढे साती और कंटक के जो खराब परिणाम जातक को भुगतने पडते है। उससे अधिक तीव्रता से राहु की महादशा के दौरान यदि शनि चंद्र नवमांश की अष्टम राशि पर से भ्रमण करता है तब सहन करने पडते है।

इसी प्रकार महादशा और अंतरदशा के साथ गोचर के समन्वय का एक और श्लोक निम्न लिखित है। जिसका उपयोग भी उपरोक्त तरीके से किया जा सकता है।

चन्द्रांशराशिमारम्य गोचरे सप्तगे शनौ।

राहुदाये वक्रभुक्तौ देहजाड़यं विनिर्दिशेत्॥

चन्द्र नवमाँश राशि से सप्तम राशि पर से शनि का गोचर राहु की महादशा में मंगल की अंतर दशा का समयकाल, जातक के स्वास्थय लिए प्रतिकुल निर्देश करता है।

उदाहरण या दृष्टान्त कुंडली का आशय केवल सिद्धान्तो को समझाने के लिए है। उदाहरण कभी भी सिद्धान्तो का निर्माण नही करतें है यह मेरी अपनी सोच है। अस्तु…….